अभिज्ञानशाकुन्तल में आयुर्वेद

Authors

  • Manju Pandey Sridev suman university

Keywords:

मुख्य शब्द- आयुर्वेद,साहित्य, ज्योतिष, केतकि, कुमुदिनी, इंगुदी, आम्र, पीपल, केसर, अपराजिता, निघण्टु, भावप्रकाश

Abstract

सारांश- कवि न केवल साहित्यशास्त्र का मर्मज्ञ होता है अपितु विविध शास्त्रों  से परिचित होता है क्योंकि कवित्व की प्राप्ति के लिए हेतु ही निर्धारित किया गया है कि कवि लोकप्रचलित शास्त्रों से परिचय रखे तभी निपुणता को  प्राप्त कर सकता है।महाकवि कालिदास ने अपने ग्रन्थों में विभिन्न आयुर्वेदिक वनस्पतियों का जिक्र किया है इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि कवि का औषधशास्त्र से कुछ न कुछ परिचय रहा ही होगा, यदि अभिज्ञानशाकुन्तल नामक नाटक की बात करें तो यह नाटक अपने वैशिष्ठ्य के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है, इस नाटक में भारतीय संस्कृति की अद्भुत छवि देखने को मिलती है। महाकवि के द्वारा प्रकृति का सुंदर वर्णन किया गया है तथा विभिन्न प्रसंगों पर लगभग 25 वनस्पतियों का नाम प्राप्त होता है यदि आयुर्वेद शास्त्र में देखें तो इनमें से प्रत्येक वनस्पति का आयुर्वेदिक महत्त्व देखने को मिलता है।इस लेख के माध्यम से महाकवि के इसी पक्ष पर सहृदय वर्ग का ध्यान आकर्षित करने हेतु तथा भविष्य में शोध कार्य की एक नई दिशा के प्रति चिन्तन के विकास हेतु महाकवि के आयुर्वेदिक ज्ञान पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए अभिज्ञानशाकुन्तल नाटक में प्राप्त 7 वृक्षों के आयुर्वेदिक महत्त्व को संक्षेप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। 

Published

2026-04-02

How to Cite

Pandey, M. (2026). अभिज्ञानशाकुन्तल में आयुर्वेद. जम्बूद्वीप - the E-Journal of Indic Studies (ISSN: 2583-6331), 5(1). Retrieved from http://journal.ignouonline.ac.in/index.php/jjis/article/view/2320